अनमोल सितारा-नहीं रहीं विद्या सिन्हा

(15 November 1947 – 15 August 2019)

विद्या सिन्हा ना उन महान अभिनेत्रियों की लिस्ट में कभी शामिल रहीं ना ही उनके चेहरे में ग्लैमर का वो तड़का था जिसकी बदौलत बे सिर पैर की फ़िल्म हिट हो जाती है, पर कुछ बात ऐसी थी कि उनके जाने के बाद उनकी छोटी छोटी फ़िल्मों की छोटी छोटी सी बात याद आने लगी है-
साल 1975 की फ़िल्म है ‘छोटी सी बात’ । अपने मोहल्ले की कॉलेज या दफ़्तर जाने वाली एक सामान्य लडकी की तरह दिखने वाली प्रभा नारायण को कैसे भूल सकते हैं। यूँ तो फ़िल्म के मुख्य किरदार सीधे सरल और शर्मिले अरुण प्रदीप यानी अमोल पालेकर थे लेकिन विद्या सिन्हा ने इसके बाद भी फ़िल्म में अपने लिए एक ख़ास जगह बना ली।
फ़िल्म का गाना है-

न जाने क्यों होता है ये जिन्दगी के साथ
अचानक ये मन किसी के जाने के बाद
करे फिर उसकी याद, छोटी छोटी सी बात
जो अन्जान पल, ढल गए कल
आज वो, रंग बदल बदल
मन को मचल मचल रहे है छल
न जाने क्यों वो अन्जान पल..
सजे भी ना मेरे नैनों में,
टूटे रे हाय रे सपनों के महल

इस गाने में विद्या के लिए बहुत कुछ नहीं था फिर भी इसके बजते ही आपके ज़ेहन में मुंबई के बस स्टॉप पर इंतज़ार कर रही ‘प्रभा नारायण’ आपको याद आयेगी।

साल 1974 की फ़िल्म है रजनीगंधा । मशहूर लेखिका मन्नू भंडारी की कहानी ‘यही सच है’ पर बनी थी फ़िल्म रजनीगंधा । ये फ़िल्म मिडिल क्लास फ़ैमिली की लडकी दीपा की है जो अतीत और वर्तमान के अपने प्रेमियों के प्रेम के अंतरद्वंद में फँसी है- वहीं से एक बड़ा ख़ूबसूरत गीत निकलता है-
कई बार यूँ भी देखा है
ये जो मन की सीमा रेखा है
मन तोड़ने लगता है
अनजानी प्यास के पीछे
अनजानी आस के पीछे
मन दौड़ने लगता है

राहों में, राहों में, जीवन की राहों में
जो खिले हैं फूल, फूल मुस्कुरा के
कौन सा फूल चुरा के
रखूँ लूँ मन में सज़ा के
कई बार यूँ भी…

जानूँ ना, जानूँ ना, उलझन ये जानूँ ना
सुलझाऊं कैसे कुछ समझ ना पाऊं
किसको मीत बनाऊ
किसकी प्रीत भुलाऊं
कई बार यूँ भी…

इस गाने को गायक मुकेश ने गाया था। मुकेश का ये एक मात्र गाया हुआ गाना है जिसे नेशनल अवॉर्ड मिला था। ख़ैर इस गाने की धुन बजते ही एक बार फिर आपके ज़ेहन में आएगी उसी सौम्य और आपके मुहल्ले की तरह दिखने वाली लड़की दीपा (विद्या सिन्हा)।
विद्या सिन्हा ने और भी कई फ़िल्मों में काम किया लेकिन अपने ये दो फ़िल्में ही ऐसी थीं जो उनके लिए ही नहीं दर्शकों के लिए भी शानदार रहीं।
दिलचस्प है कि इन दोनों फ़िल्मों का निर्देशन बासु चटर्जी ने किया और दोनों ही फ़िल्मों का संगीत सलिल चौधरी ने दिया।

 

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