कश्मीर ले रहा है एक नई करवट JAKF और स्थानीय लोगों की एक पहल

ये अपनी तरह की एक अनूठी पहल है इसके अंतर्गत एक बैठक शोपियां (दक्षिण कश्मीर) में उग्रवादियों के परिवारों के साथ मिलकर आयोजित की गई थी, ये बैठक अरहाम शोपियां (दक्षिण कश्मीर) के पास आयोजित की गई, जिसमें पूर्व उग्रवादियों के माता-पिता के साथ अन्य स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया।

इस बैठक में कश्मीर की घाटी में होने वाली हिंसा पर मुख्य चर्चा हुई , फारूक अहमद के अध्यक्ष जेकेएएफ ने बैठक की अध्यक्षता की और प्रवक्ता के रूप में जेकेएएफ ने कहा यहाँ होने वाली हिंसा के कारण विकास रुक गया है और यहाँ रहने वाले
कश्मीरी बाकी राज्यों से तरक्की और प्रगति के मामले में पिछड़ रहे है, इस बात पर भी चर्चा हुई कि जो लोगों वहाँ शांति और उन्नति में बाधक बन रहे है और यहाँ होने वाली हिंसा का प्रचार करने का नेतृत्व कर रहे है वे खुद अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाने के साथ सुरक्षित और शानदार जीवन जी रहे हैं। और इधर घाटी में हिंसा करने वाले गुमराह युवाओं के साथ साथ उनके परिवार वाले अपनी जान की कीमत दांव पर लगा कर बैठे है। उनके लिए एक पहल होनी चाहिए सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए ये बात इस संदर्भ में भी देखी जा रही है कि हिंसा किसी के लिए अच्छी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इसमें लिप्त लोगों से इससे बाहर आ जाने की अपील जारी कर रखी है। इस लिहाज से ये बैठक एक अच्छी पहल कही जा सकती है जिसके द्वारा बदले काश्मीर की आहट साफ सुनी जा सकती है और साथ ही ये भी की अब कश्मीर और हिंसा नहीं चाहता। सरकार को इस दिशा में संज्ञान लेते हुये इन लोगों को मदद करनी चाहिए और अन्य जिलों में भी जागरूकता कैम्प और बातचीत की पहल करनी चाहिए।

यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि मुख्य रूप से सशस्त्र बलों द्वारा निष्प्रभावित 118 आतंकवादियों के शोपियां के परिवारों ने इस बैठक में भाग लिया, जिसमें खूंखार आतंकवादी सद्दाम पद्दर और नासिर अहमद वानी के माता-पिता भी शामिल थे। उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए कि चूंकि युवा कश्मीर का भविष्य है; हम संयुक्त रूप से वंचितों के लिए सहायता चाहते हैं, अपने बच्चों के लिए शैक्षिक आवश्यकताओं के लिए वित्तीय सहायता चाहते है।

 

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