यादों के झरोखे से-भारत के महान सपूत स्वर्गीय राजीव गाँधी को श्रद्धांजलि

भारत में तकनीक के प्रणेता स्वर्गीय राजीव गांधी जी, जो कि अमेचर हैम रेडियो के लाइसेंस धारक भी थे, सन 1975 में उन्होंने वायरलेस तकनीक का हैम रेडियो के तौर पर इस्तेमाल शुरू किया उनका हैम रेडियो एड्रेस था RU2RG मुख्यतः यह वायरलेस कम्युनिकेशन की तकनीक सरकारों खासतौर मिलिट्री के अधीन रही, किन्तु आम आदमी की पहुंच हो सके इस तकनीक की इसके लिए राजीव गांधी के प्रयास अतुलनीय है, हैम रेडियों के संचालन के लिए 14 वर्ष की उम्र को 12 वर्ष कर दिया, और हैम रेडियो के उपकरणों से इम्पोर्ट ड्यूटी भी घटा दी, 1983 में तीनमूर्ति भवन में हैम रेडियो प्रसारण सेवा की स्थापना हुई, दरअसल ब्रिटिश भारत मे प्रथम विश्व युद्ध के बाद हैम रेडियो के लाइसेंस की उपलब्धता थी, और 1921 में पहले भारतीय ने यह लाइसेंस हासिल किया, फिर आजादी की लड़ाई में भी इस रेडियों ने बहुत सुंदर भूमिका निभाई नरीमन प्रिंटर्स ने आजाद हिंद रेडियो की शुरुवात की जिसमे बापू की बाते मुख्यतः प्रसारित होती थी, फिर कांग्रेस रेडियो की स्थापना हुई ये सभी रेडियो अंग्रेजी सरकार ने बन्द करा दिए और इनके लाइसेंस रद्द कर देय गए, 1939 में द्वतीय विश्वयुद्ध में भी ब्रिटिश सरकार ने सभी हैम रेडियो धारकों के लाइसेंस सरेंडर करा लिए थे ताकि एक्सिस ताकतों के लिए कोई जासूसी न कर सके, आजाद भारत मे 1948 में अमेचर रेडियो क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना हुई बाद में यही क्लब 1954 में अमेचर रेडियो सोसाइटी ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाने लगा। अब यही अमेचर रेडियो सोसाइट ऑफ इंडिया इंटरनेशनल अमेचर रेडियो सोसाइटी में भारत का प्रतिनिधित्व करती है, रेडियों वाकई क्रांतिकारी रहा चाहे फिर वह आजादी की लड़ाई हो सामाजिक समरसता, राजनीति, शिक्षा स्वास्थ्य व कृषि में जबरदस्त योगदान रहा, और सबसे बड़ा योगदान है प्राकृतिक व मानव जनित तबाही में, जब संचार के सब माध्यम ध्वस्त हो जाते हैं तब यह वायरलेस तरंगे हमारा साथ देती है सूचनाओं के आदान प्रदान में, फिर चाहे वह सुनामी हो या विश्व युद्ध या अर्थक्वेक…फिर भी यह निजी रेडियो लाइसेंस मिलिट्री और सरकारों के प्रभाव से बाहर नही निकल पाया भारत मे अब तक 17000 लगभग हैम रेडियो लाइसेंस धारक है, इस लाइसेंस के लिए भारत के प्रमुख शहरों में प्रत्येक दो महीने में परीक्षाएं आयोजित की जाती है जिनमे मोर्स कोड और रेडियो तकनीक से सम्बंधित सवालों का जवाब देना होता है, फिर इंटरव्यू और कई राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभागों द्वारा परमिशन की आवाश्यकता भी होती है तभी आप इस रेडियो को संचालित कर सकते है, यदि इस प्रक्रिया को थोड़ा आसान कर दिया जाए तो निश्चित ही लाइसेंस की संख्या में इजाफा होगा, विभिन्न फ्रेकेन्सी पर हैम रेडियों संचालकों की आवाजें गूँजेगी, सूचनाओं का आदान प्रदान किसी भी परिस्थिति में पूरे ग्लोब पर सम्भव हो सकेगा…।

कृष्णा कुमार मिश्र

 

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