चंपारण तो महज शुरुआत थी-महात्मा गांधी की

@सुनील कुमार मिश्र

 

चंपारण_शुरुआत_थी

गाँधी मे एक बहुत बड़ी खूबी थी वो किसी की बात आँख मूंदकर नही मान लेते थे। गाँधी ने अंग्रेजों के कुशासन के खिलाफ बहुत से आन्दोलन किये उसमे से सबसे पहला और सफल आंदोलन था “चंपारण सत्याग्रह”। चंपारण बिहार प्रांत का जिला है और उस समय यहाँ के जमींदार और ब्रितानी हुकूमत मिल कर किसानों को नील की खेती को मजबूर कर रहे थे। इस जिले के किसान काफी परेशान थे, क्योंकि नील की खेती करने से उनकी जमीन खराब हो रही थी। किसानों को उनके खेत के अधिकतर भाग में नील की खेती करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। जिसके कारण किसान किसी भी खाने की चीज की खेती नहीं कर पा रहे थे। जिस वक्त बिहार के इस जिले में ये सब हो रहा था, उसी वक्त हमारे देश को आजाद करवाने की लडाई भी शुरू हो गई थी। चंपारण’ के राज कुमार शुक्ला और संत राउत ने गांधी जी से लखनऊ में जाकर मुलाकात की थी और गांधी जी को चंपारण के किसानों पर हो रहे अत्याचारों के बारे में जानकारी दी थी। समय ना होने के बावजूद राजकुमार शुक्ला की ज़िद गांधी को चंपारण ले आती है।

10 अप्रैल 1917 को गाँधी चंपारण पहुचे और पूरे जिले के कई गांवों का दौरा करके स्थिति का जायजा लिया। गांधी जी ने पाया की यहां के गांव के लोग अशिक्षित हैं और बहुत निम्न स्तरीय जीवन जी रहे है। जिसके कारण यहां के जमींदारों द्वारा इनका शोषण किया जा रहा है। जब गांधी जी इस जिले में पहुंचे तो इस जिले के मजिस्ट्रेट ने इन्हें एक नोटिस जारी करके जिला छोड़ देने का आदेश दिया। गांधी जी ने मजिस्ट्रेट के इस आदेश को नहीं माना। जिसके कारण गांधी जी को अदालत में पेश होने के लिए बुलाया गया। वहीं मजिस्ट्रेट ने गांधी जी को एक और पत्र लिखकर कहा कि , ‘अगर आप इस जिले को छोड़ देते हैं और वापस लौटने का वादा करते हैं, तो आपके खिलाफ दर्ज किया गया मामला वापस ले लिया जाएगा। मजिस्ट्रेट के इस पत्र का जवाब देते हुए गांधी जी ने कहा कि ‘मैं मानवता और राष्ट्रीय सेवा प्रदान करने के लिए यहां आया हूं। चंपारण मेरा घर है और मैं यहां के पीड़ित लोगों के लिए काम करूंगा’। मैं इस जिले से अभी नहीं जा सकता। जिले में अशांति पैदा करने के आरोप के चलते पुलिस ने गांधी जी को हिरासत में ले लिया। गांधी जी के गिरफ्तार होने की खबर जैसे ही यहां के किसानों को लगी तो उन्होंने पुलिस स्टेशन सहित कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। जिसके बाद यहां की अदालत को गांधी जी को रिहा करना पड़ा, लेकिन गांधी ने अदालत से कहा कि कानून के हिसाब से कार्रवाही की जाये। मजिस्ट्रेट मुश्किल मे पढ गया और आदेश को सुरक्षित रख कर गाँधी को छोड़ दिया गया।

इस दौरान ब्रिटिश सरकार को गांधी जी की ताकत का अनुभव हो चुका था और ब्रिटिश सरकार ने किसानों की शिकायतों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया और इस समिति का हिस्सा गांधी जी को भी बनाया गया। इस समिति के गठन के कुछ महीनों के भीतर चंपारण कृषि विधेयक पारित किया गया। इस विधेयक की मदद से किसानों को काफी राहत दी गई और जमींदारों की मनमानी पर लगाम लगाई गई। किसानों के लिए अधिक मुआवजा देने और खेती पर नियंत्रण देने का जिक्र भी इस विधेयक में किया गया और इस तरह से गांधी जी ने यहां के किसानों की मदद की।

यह आंदोलन पूरा एक साल चला और इस बीच मे गाँधी ने जिले मे स्कूल खुलवाये और अपृश्यता के विरुद्ध लड़े और लोगो को स्वच्छता से रहने को ना सिर्फ बोला बल्कि स्वयं अपने कार्य सेवको के साथ जिले की सफाई का हिस्सा बने…

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