ऐसा देश है मेरा -आपसी सौहाद्र की मिसाल

गत 15 मई की ये यह तस्वीर उत्तराखंड के ऋषिकेश की है जब देहरादून के एक मदरसे के छात्र अपने शिक्षकों के साथ ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन गुरुकुल पहुंचे। वहां गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने बांहें फैलाकर उनका स्वागत और गले मिलकर उनका अभिनंदन किया। दोनों संस्थानों के छात्रों ने साथ बैठकर देश भक्ति के कुछ गीत गाए। साथ में वेद और क़ुरआन का पाठ किया। वेद की ऋचाओं और कुरआन की आयतों की गलबहियों का दृश्य देखने लायक था। मौके पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा – मदरसा चल कर मठ, आश्रम और गुरुकुल आए और मठ चलकर मदरसों तक पहुंचे। दोनों एक दूसरे की आस्थाओं और जीवन मूल्यों को समझने की कोशिश करें। तभी हम भावी पीढ़ियों को एकता के संस्कार दे सकेंगे।’

बांटने की सियासत की तमाम साज़िशों के बीच हमें जोड़े रखने की देहरादून के मदरसे और ऋषिकेश के गुरुकुल की यह पहल स्वागत योग्य है। वक़्त की मांग है कि देश में चल रहे धार्मिक शिक्षा के सभी संस्थान अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के बीच आपसी समझ और भरोसा क़ायम करने के उद्देश्य से नियमित रूप से आपसी मेल-मिलाप के ऐसे ही अवसर पैदा करें।

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